क्या आपका बच्चा पढाई में कमजोर है और पढाई में उसका मन भी नहीं लगता यदि हां तो न हो परेशान


विद्यार्थियों को पढाई करते समय अपना मुंह हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखना चाहिए। इससे सकारात्मक ऊर्जा मिलती है और पढ़ाई में ध्यान लगा रहता है। मकान के उत्तर-पूर्व कोण के बने कमरे में दक्षिण या पश्चिम की ठोस दीवार के सहारे बैठकर पढ़ने से सफलता जल्दी मिलती है। अध्ययन-कक्ष में विद्यार्थियों को सदैव पूर्व, उत्तर या ईशान कोण की तरफ मुंह करके पढ़ना चाहिए। इससे वह विलक्षण प्रतिभा का धनी व ज्ञानवान होगा। पूर्व दिशा की ओर मुंह करके पढ़ने वाले बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस अधिकारी तक हो सकते हैं। पूर्व दिशा लिखने-पढ़ने के लिए सर्वोत्तम होती है। उत्तर-पूर्व में रहने वाले बच्चे की सेहत भी काफी अच्छी रहती है। इस कमरे में उत्तर-पूर्व की दीवार पर रोशनदान या खिड़की जरूर होनी चाहिए।  विद्यार्थियों को ऐसे स्थान पर पढ़ाई नहीं करनी चाहिए, जहां पर बाहर की वायु का प्रवाह सीधे आप पर पड़ता हो, अर्थात् दरवाज़े या खिड़की के पास  बैठकर नहीं पढ़ना चाहिए। क्योंकि खुले दरवाज़े और खिड़की पढ़ाई में एकाग्रता प्रदान नहीं करते।दक्षिण-पश्चिम (नैत्य कोण) दक्षिण, वायव्य कोण अध्ययन कक्ष के लिए उपयुक्त नहीं होते। उत्तर-पश्चिम दिशा के बढ़े हुए भाग में बच्चों को कभी भी पढने न दें। यहां अध्ययन करने से बच्चे के घर से भागने की इच्छा होगी। बच्चे को आग्नेय कोण में बैठकर पढ़ने से मना करें, क्योंकि यहां बैठने से बच्चा हमेशा ही पेरशान रहता है। मेहनत करने के बावजूद भी सफलता हाथ नहीं लगती।

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